भारत का पर्यावरण और इलेक्ट्रिक व्हीकल : एक रिपोट

भूप एक्सप्रेस।

चंडीगढ। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से विधुयत संचालित वाहनों (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की जरूरत और इसका उद्योगीकरण भारत में 21वी सदी की मांग भी है। पेट्रोल एवम डीजल की बढ़ती खपत एव बढ़ते दामों ने इलेक्ट्रिक व्हिकल के बाजार में निवेश को बढ़ावा दे रहा है।

हाल ही प्रकाशित शोध “रोल ऑफ स्मार्ट मैटेरियल्स एवं डिजिटल ट्विन (डीटी) फ़ॉर एडॉप्शन ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया” में बताया कि तेजी से समाप्त होते गैसोलीन ईंधन और ग्लोबल वार्मिंग के चलते पर्यवरण प्रदूषण से निजात हेतु विश्व भर में इलेक्ट्रिक व्हिकल उद्योग की जरूरत है। शोध के लेखक प्रोफेसर अजय प्रजापति ने बताया के ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में भारत विश्व मे चौथे नंबर पर है और प्रदूषण रहित वातावरण हेतु विभिन्न इकाईयो की जरूरत है। विभिन्न इकाईयो में से एक इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योगीकरण में स्मार्ट मटेरियल एवं डिजिटल ट्विन (डीटी) का उद्योग 4.0 प्रौद्योगिक में अहम रोल रहेगा।

डिजिटल ट्विन (डीटी) एक भौतिक प्रणाली (मॉडल) है जो वाहन के वास्तविक समय मे स्थिति को अपने वर्चुअल ट्विन के साथ विनिमित करने में मदद करता है। जिससे वाहन की विंभिन्न मापदण्डों जैसे कि जीवन एवं विफलता चक्र, तथा प्रदर्शन (परफॉरमेंस) का आंकलन किया जा सकता है और डेटा को संरक्षित कर वाहन के जीवन चक्र एवं क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

इलेक्ट्रिक व्हिकल के उद्योगीकरण हेतु भारत सरकार 2030 तक ऑटोमोटिव सेक्टर को पूर्णतः विद्युत संचालित वाहन सड़को पर उतारने का लक्ष्य निर्धारित है और इस क्षेत्र में पेरिस अग्रीमेंट के लिए अग्रसर है। अभी तक फेम (FAME) योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय मोटर वाहन बोर्ड (NAB)के आंकड़ो के अनुसार भारत मे तकरीबन 1.5 लाख इलेक्ट्रिक व्हिकल भारत की सड़कों पर दौड़ रहे है और 5.20 लाख इलेक्ट्रिक व्हिकल हेतु रजिस्ट्रशन जुलाई 2021 तक हो चुका है। भारत मे इलेक्ट्रिक व्हिकल से हर रोज 8 हजार लीटर ईंधन की बचत हो रही है और CO2 उत्सर्जन को कम कर पा रहे है। जिससे ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम किया जा सके।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हिकल के क्षेत्र में वाहन की सर्विस, रखरखाव, बैटरी की क्षमता, चलन सीमा, बैटरी चार्ज करने का समय, चार्जिंग स्टेशन, और बैटरी का पुनर्चक्रण आदि चुनौतियां हाल ही में उद्योग जगत के समक्ष है और उसके समाधान हेतु कार्यरत है।
इन उपरोक्त चुनौतियों में से अभी तक भारत मे कुल 650 चार्जिंग स्टेशन है और अभी भी 4.50 लाख चार्जिंग स्टेशन की जरूरत है।