कोरोना में पढ़ाई : ऑनलाइन और ऑफलाईन में फंसा विद्यार्थी : आनंदश्री

भूप एक्सप्रेस।
मुम्बई। करीब दो साल बाद ऑफ लाईन स्कूल की शुरुवात कुछ नियम के साथ शुरू कर दी गयी। पिछले साल विद्यार्थी कोरोना के चलते परीक्षा नही देनी पड़ी। लेकिन इस वर्ष तो परीक्षा होगी। इसी आधार पर बोर्ड में बैठने वाले विद्यार्थी की पढ़ाई ऑफ लाईन और ऑन लाईन के माध्यम से शुरू हो गयी। चार महीने बाद बोर्ड परीक्षा होगी। इसी को ध्यान में रख कर विद्यार्थी, अभिभावक, और अध्यापक मेहनत में जुट गए है।

    ऑनलाईन का परिणाम

कहते है कि something is better than nothing. कुछ नही से कुछ तो अच्छा है। ऑनलाईन , ऑफलाईन का पर्याय बना। बच्चे अब मोबाईल में पढ़ाई करने लगें थे। कोरोना में कुछ तो दिमाग मे जाए। इसे एक अच्छा सच्चा पर्याय माना गया।
दो साल बाद यही अच्छा सच्चा घातक सिद्ध हुआ।

           आज की स्थिति

मुझे पैरेंट टीचर मीटिंग में जाने का मौका मिला। वंहा के परिणाम को सुन कर मैं स्वयम चौंक गया। जब क्लास में ऑफ लाईन टेस्ट लिया गया तो बच्चे लिख नही पा रहे थे। तीन बातें वहां के टीचर को समझ में आयी।
१- लिखने की क्षमता कम हो गयी और लिखावट गिर गयी।
२- समय प्रबंधनता की कमी।
३- एकाग्रता का अभाव ।

और भी कई बातें अध्यापकों के समझ में आयी। लेकिन उनमें ये तीन प्रमुख कारण थे।

         समस्या है तो हल भी है

फिर से बेसिक से शुरूवात किया जा सकता है। विद्यार्थियों पर एक दम जोर न देते हुए धीरे धीरे तैयारी करने का यह समय है।

      मानसिक रूप से तैयारी करना

मानसिक रूप से तैयारी करना बहुत बहुत जरूरी है। किसी भी वस्तु या घटना का निर्माण दो बार होता है। एक बार दिमाग मे और दूसरी बार वास्तविकता में। अच्छे परिणाम के लिए पढ़ाई के साथ साथ मन का स्वस्थ और मस्त होना जरूरी है।

             लिखने की आदत

लिखने की आदत , याद करने के साथ साथ चलनी चाहिए। विषय के कांसेप्ट को समझने के लिए दिमाग के साथ साथ उसे अंगूठे और उंगलियों में भी लिख कर याद करें। अभ्यास अभ्यास और अभ्यास करते रहे।

     याद करने का रामबाण उपाय

ध्यान कहो या मेडिटेशन। सिर्फ आंख बंद करने को ध्यान नही कहते। अपने अंदर की यात्रा, मन, मस्तिष्क, शरीर को अलाइनमेंट को ध्यान कहते है। अपने आप को साक्षी में रखते हुए। मन के पार जाना ध्यान है। यह रोज रोज़ करने वाली क्रिया है। जितना बाहरी डिट्रक्टिव से बचोगे उतना ही अपने आप से जुड़ोगे। जितना अपने आप से जुड़ोगे, उतना ही ध्यान बढेगा।

            समय का ऑडिट करें

24 घंटे में से 8 घंटे निकाल दिया जाए तो 16 घंटो का ऑडिट करें। कंहा कंहा समय प्रोडक्टिविटी हो रही है और कंहा व्यर्थ। चेक करते रहे। समय के गुलाम नही उसके मास्टर बने।

कोरोना का गुजरा समय सभी के लिए नुकसानप्रद रहा। इसी नुकसानप्रद को शिक्षा प्रद बनाइये। शिक्षा पर सभी का अधिकार है। शिक्षित बने और आगे बढ़े।