पिछड़ा वर्ग से जुड़ा जनमानस 30 अक्तूबर को भाजपा के पक्ष में न करें मतदान: प्रो. लिंबा

कहा, सदियों से पिछड़ा वर्ग के साथ राजनीतिक पार्टियां कर रही हैं भेदभाव

भूप एक्सप्रेस।

सिरसा। पिछड़ा वर्ग के साथ राजनीति पार्टियों द्वारा सदियों से भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण को लागू करने के आदेश को भी सरकार दरकिनार का कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है। इसलिए उनकी पिछड़ा वर्ग समाज के तमाम जनमानस से ये अपील है कि वो वर्तमान सरकार के पक्ष में मतदान न करें। उक्त बातें पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा, हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. आरसी लिंबा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। प्रो. लिंबा ने कहा कि बीसी की 45 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद शासन व प्रशासन में पिछड़ा वर्ग की भागीदारी न के बराबर है। जिसका मुख्य कारण समय-समय की सरकारों द्वारा सामाजिक व राजनीतिक उपेक्षा एवं भेदभाव रहा है। ये लोग हमें केवल और केवल वोट बैंक के रूप में ही इस्तेमाल करते आ रहे हैं। प्रो. लिंबा ने बताया कि किसी भी सरकार को गिराने और बनाने में समाज निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में क्लास वन और टू की नौकरियों में केवल 15 प्रतिशत आरक्षण है। इसी प्रकार पंचायतों स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए महासभा आवाज उठा रही है, लेकिन सरकार ने केवल बीसी ए को 80 प्रतिशत का लॉलीपॉप दिखाकर कोर्ट में केस लगवा दिया।

बीसी क्रीमिलेयर जोकि 1992 से सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक बैंच ने परिभाषित किाया था, वही पूरे देश में लागू है और 2016 तक हरियाणा में लागू रहा, लेकिन सत्ता में आते ही बीजेपी सरकार ने आरक्षण को खत्म करने की मंशा से अगस्त 2016 में एक नोटिफिकेशन जारी कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी आरक्षण के दायरे से बाहर कर दिया। प्रो. लिंबा ने बताया कि इस नोटिफिकेशन को जब जून 2018 में लागू किया गया तो बच्चों ने उच्च न्यायालय में चेलेंज किया। जिसमें सरकार हार गई। सरकार के सुप्रीम कोर्ट में जाने पर पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा ने जनहित याचिका दायर कर केस लड़ा। 3-4 साल की लड़ाई के बाद फैसला महासभा के पक्ष में आया। 24 अगस्त 2021 को आए फैसले को सरकार अभी तक लागू नहीं कर रही है। जिसे लेकर महासभा में रोष है। महासभा ने इसी के विरोध में फतेहाबाद में धरना लगाकर सरकार को 20 अक्तूबर तक इसे लागू करने की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने अभी तक कोई विचार नहीं किया। उन्होंने समाज की अन्य मांगों क्लास वन और टू की नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने, पंचायती व निकाय चुनावों में बीसी ए व बी को क्रमश: 16 व 11 प्रतिशत आरक्षण देना, 2022 की जाति आधारित जनगणना, हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग का जल्द पुनर्गठन, निजी क्षेत्र में आरक्षण कानूनों की वापसी को भी पूरा किया जाए। उन्होंने पिछड़ा वर्ग से जुड़े तमाम जनमानस से अपील की कि वे 30 अक्तूबर को मतदान के दिन भाजपा सरकार के पक्ष में मतदान न कर अपने विवेक से मतदान करें। इस मौके पर इंद्र सिंह, उपप्रधान डा. वेदपाल आर्य, महासचिव राजबीर सिंह, रामदत्त सहित अन्य महासभा से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।