फेर इंकलाब ल्याणा सै

भूप एक्सप्रेस।
जींद।

यो अंधेरा इब बधदा ए जावै सै।
आदमी न आदमी खाण न आवै सै।।

बेरा ना कित्त गए वे आदर्श जो आदमी न आदमी बणावे सै।
ओे तो , चाला ए हो रहया सै।।

आदमी न आदमी खाण न हो रहया सै।
रपिया का घमंड घणा ए सतावै सै।।

गरीब आदमी न लात मार क दबावै सै।
अर इन सरकारा का तो घणा ए बुरा हाल सै।।

कदे गरीब आदमी पढ़ जा इनकै यो ए विचार सतावै सै।
अर इसे करकै ये फिस बढ़ावे सै ।।

चाला हो रहया स रै, आदमी न आदमी खाण न आवै सै।
मैं न्यू कहुं इनतै जवाब देना चाहिए सै।।

करकै मुठ्ठी बंद इंकलाब ल्याणा चाहिए सै।
रोहित की बात प थोड़ा सा विचार करणा चाहिए सै।
करकै मुठ्ठी बंद इंकलाब ल्याणा चाहिए सै।।

रोहित कुमार,गांव: रत्ता खेड़ा, तहसील : सफीदों, जिला जींद (हरियाणा)।