डॉक्टर राजदीप और डॉ. वेद प्रकाश, डॉक्टर ही नहीं बल्कि साक्षात भगवान हैं : आरती

आशिर्वाद हॉस्पिटल में होता है वाजिब फीस में हर बिमारी का ईलाज

भूप एक्सप्रेस।
पानीपत(जोगिंद्र सिंह)। अक्षर लोगों से ये सुनने को जरूर मिलता था कि डॉक्टर भगवान का रूप होता है, लेकिन बुधवार को सनौली रोड स्थित आशिर्वाद हॉस्पिटल में एक मरीज कुमारी मधु व उनकी रोती हुई उनकी मां आरती के मुख से साक्षात सुनने को मिला कि वास्तव में डॉक्टर भगवान से कम नहीं होता।

भूप एक्सप्रेस संवाददाता को सूचना मिली कि सनौली रोड स्थित आशिर्वाद हॉस्पिटल में एक ऐसे सीरियस मरीज का ऑपरेशन हुआ है, जिसकी बड़ी आंत फटने से पेट में इन्फेक्शन काफी बढ़ा हुआ था और ऑक्सीजन का स्तर भी काफी कम था। मिली जानकारी अनुसार कुलदीप नगर निवासी बाबादीन की बेटी मधु ने संवाददाता को बताया कि कुछ दिनों से उसके पेट में दर्द सा रहता था, जिसको उन्होंने कई प्राइवेट हॉस्पिटलों में दिखाया और पेट का अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला कि उनकी आंत इन्फेक्शन के कारण फट गई है, जिसका ऑपरेशन कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उनके मम्मी पापा उनको कई हॉस्पिटलों में लेकर गए लेकिन ऑपरेशन खर्च सुनकर वें अपनी गरीबी को कोसते हुए अपने घर आ जाते।

मधु की माता आरती ने बताया कि उनके किसी जानकार ने उनको करनाल के कल्पना चावला मैडिकल कॉलेज में जाने की बात कही कि वहां बड़ा हॉस्पिटल है और सरकारी है जिसमे नाममात्र पैसों में लड़की का ऑपरेशन हो जाएगा।
जानकार की बात मानकर वें करनाल गए लेकिन वहां पर ओपीडी कराई तो डॉक्टरों ने लड़की की हालत देख कर कहा कि कई प्रकार के टेस्ट करवाने के लिए कहा। मधु की माता ने बताया कि उनसे अपनी बेटी की बढ़ती पीड़ा और दर्द से उनका कर्राहना देखा नहीं गया और वे अपनी बेटी वहां से रैफर करवा लिया।


आरती ने बताया कि उन्होंने “आशिर्वाद हॉस्पिटल” के बारे में लोगों से सुना था कि वहां के संचालक डॉक्टर राजदीप बहुत ही अच्छे और नेक डॉक्टर हैं जो कम पैसों में बेहतर ईलाज करते हैं। इसलिए वे कल्पना चावला मैडिकल कॉलेज से सीधे यहां”आशिर्वाद हॉस्पिटल” में अपनी बेटी को लेकर आ गए, जहां डॉ. ने तत्काल सभी टैस्ट, अल्ट्रासाउंड आदि रिपोर्ट के आधार पर उनकी बेटी का ऑपरेशन किया और उनकी जान बचाई। उन्होंने कहा कि डॉक्टर राजदीप और डॉक्टर वेद प्रकाश डॉक्टर ही नहीं बल्कि साक्षात भगवान और गरीबों के मसीहा है, जो पैसों का लालच ना करके मरीज को बचाने में विश्वास रखते हैं। यह कहते हुए आरती की आंखों से आंसू छलक आए थे।

इस सन्दर्भ में जब हॉस्पिटल संचालक डॉक्टर राजदीप से बात कि तो उन्होंने बताया कि उनका कर्म भी है और कृतव्य भी है कि वे बिना किसी लोभ लालच के वाजिब फीस में पैसेंट को सही व बेहतरीन ढंग से ईलाज दें ताकि वह जल्द स्वस्थ होकर अपना खुशहाल जीवन जिए। उन्होंने कहा कि उनका एवं उनके हॉस्पिटल की टीम का सदैव यही प्रयास रहता है कि जो भी व्यक्ति किसी बिमारी से पीड़ित उनके यहां आता है वह जल्द ही स्वस्थ हो कर हंसता हुआ अपने घर लौटे, बाकि सब भगवान की लीला है, उन्हीं की अनुकम्पा और कृपा दृष्टि है, वह सभी को दीर्घायु प्रदान करे स्वस्थ रखें।

मधु के बारे में उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी आंत फट गई थी, जिसके कारण उनके पेट में इन्फेक्शन बढ़ता जा रहा था, ऑक्सीजन का स्तर भी काफी कम हो गया था, जिससे उनको सांस लेने में भी भारी दिक्कत हो रही थी। पेसेंट की गम्भीर हालत को देखते हुए उन्होंने हॉस्पिटल चेयरमैन डॉक्टर वेदप्रकाश से बात कर उनकी सहमति से पांच डॉक्टरों की एक टीम गठित कर उनका करीब 2 घण्टे का का ऑपरेशन किया गया। भगवान की कृपा और सभी अनुभवी डॉक्टरों के प्रयास एवं उनके हॉस्पिटल के पैरामेडिकल व अन्य स्टाफ की स्तर्कता भरी देखरेख से मधु का ऑपरेशन सफल रहा। परिणाम स्वरूप आज मधु उस गम्भीर हालत से एकदम बाहर है और स्वस्थ महसूस करते हुए हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो अपने घर जा रही है।

डॉक्टर राजदीप ने हॉस्पिटल के बारे में बताया कि इस तरह की 4 -5 सर्जरी पहले भी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं और उनका एवं उनकी हॉस्पिटल की टीम का सदैव प्रयास रहता है कि सभी पेसेंट उनके यहां से स्वस्थ होकर ही अपने घर लौटे।

संचालक डॉक्टर राजदीप, सुप्रीटेंडेंट डॉ. इन्दू एवं सौरभ/सौरव, राकेश, शीतल, सुमन, रक्षित व निशा आदि मैडिकल स्टॉफ ने मधु को उनका सफलतापूर्वक ऑपरेशन होने एवं हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो सकुशल अपने घर लौटने की खुशी में उन्हें फूल मालाएं पहनाकर उन्हें दीर्घायु होने का आर्शीवाद देते हुए उनके सदा स्वस्थ रहने की भगवान से कामना की।