भूप एक्सप्रेस न्यूज।
पानीपत। पानीपत में डेंगू बुखार के मरीजों की संख्या जिला में हर तीसरे-चौथे दिन बढ़ रही है। बढ़ते खतरे से सावधान रहने की जरूरत है। जिला में अब तक बुखार ग्रस्त सात लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, ग्राम पंचायतों के भरोसे न रहकर, इन विभागों का सहयोग करें। डेंगू फैलाने वाले मच्छरों काे पनपे का मौका ही न दें, इनका लार्वा खुद नष्ट करें।

डिप्टी सिविल सर्जन डा. सुनील संडूजा (वैक्टर बोर्न डिजीज) ने बताया कि डेंगू बुखार सात से दस दिनों तक सताता है।ओ.पी.डी. में मिले इलाज-परामर्श से ही अधिकांश रोगी ठीक हो रहे हैं। मात्र 10 प्रतिशत रोगी ऐसे हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है। डेंगू के सामान्य लक्षण बुखार, तेज़ बदन दर्द, सिर दर्द, आंखों में दर्द और शरीर पर दाने निकलना हैं। इस स्थिति को नार्मल डेंगू यानि क्लासिकल कहते हैं। डेंगू हेमरेजिक फीवर खतरनाक साबित हो सकता है। प्लेटलेट्स बहुत तेजी से घटती जाती हैं।
नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना, त्वचा पर चकत्ते दिखना इसके लक्षण हो सकते हैं। तीसरा है डेंगू शाक सिंड्रोम। इसमें मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है। रक्तचाप बहुत कम हो जाता है। तेज बुखार के बावजूद त्वचा ठंडी रहती है।
डा. संडूजा ने बताया कि प्लेटलेट्स घटने का अर्थ डेंगू नहीं है। यह वायरल, मलेरिया, टाइफाइड में भी कम होती हैं। प्लेटलेट्स की संख्या कम होकर 20 हजार हो जाए तो तुरंत प्लेटलेट्स का पैक चढ़वाएं। मरीज के मसूढ़ों, शौच में खून नहीं आ रहा है तो कई बार दवा और खानपान से ही प्लेटलेट्स बढ़ जाती हैं।

मच्छर न पनपें, करें ये इंतजाम

घर या आसपास पानी जमा न होने दें।

साफ पानी का स्टाक है तो उसे ढककर रखें।

फ्रीज की बाहरी ट्रे में थोड़ा से केरोसिन डालें।

गमलों का पानी रोजाना बदलें।

छत पर खाली डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें न रखें।

छत पर रखी पानी की टंकी को ढक्कन बंद रखें।

मच्‍छर न काटें, करें ये इंतजाम

शरीर का ढ़कने वाले कपड़े पहनें।

मच्छर गाढ़े रंग पर आकर्षित होते हैं इसलिए हल्के रंग के कपड़े पहनें।

घर में रूम फ्रैशनर न छिड़कें, मच्छर अधिक आते हैं।

सोने से पहले हाथ-पैर और शरीर के खुले हिस्सों पर विक्स लगाएं।

मच्छरों को भगाने और मारने के लिए गुग्गल जलाएं।