हरियाणा प्रदेश के निकायों में BC-A आरक्षण को सीएम मनोहर ने दी मंजूरी; बोले- पिछड़े वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व कम होने पर लिया फैसला

(बीसी-ए) का राजनीतिक ढांचे में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए उन्हें स्थानीय निकायों, नगर पालिकाओं के चुनाव में आरक्षण के

भूप एक्सप्रेस।

चण्डीगढ़, 8 मई (नन्दपाल)। हरियाणा के शहरी स्थानीय निकायों में BC-A के राजनीतिक आरक्षण अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। कैबिनेट से चर्चा के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था में पिछड़े वर्गों का राज्य में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

रिपोर्ट में प्रतिनिधित्व कम मिला
आयोग की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दर्शन सिंह ने नागरिकों के पिछड़े वर्गों के राजनीतिक पिछड़ेपन के आकलन के लिए जांच की। जांच में आयोग ने पाया कि नागरिकों के पिछड़े वर्गों, ब्लॉक-ए (बीसी-ए) का राजनीतिक ढांचे में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए उन्हें स्थानीय निकायों, नगर पालिकाओं के चुनाव में आरक्षण के समर्थन की आवश्यकता है, ताकि पर्याप्त भागीदारी हो सके।

ब्लॉक-ए का पद होगा आरक्षित

प्रत्येक नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका में पार्षद का पद नागरिकों के ब्लॉक-ए के पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित होगा। इस प्रकार आरक्षित सीटों की संख्या उस क्षेत्र में सीटों की कुल संख्या के समान अनुपात में हो सकती है। शहरी स्थानीय क्षेत्र, उस शहरी स्थानीय क्षेत्र में कुल आबादी के नागरिकों के पिछड़े वर्ग ब्लॉक-ए की आबादी के आधे प्रतिशत के रूप में होगी। यदि दशमलव मान 0.5 या अधिक है तो इसे अगले उच्च पूर्णांक तक पूर्णांकित किया जाएगा। बशर्ते कि यदि पिछड़े वर्ग (ए) की आबादी सभा क्षेत्र की कुल आबादी का दो प्रतिशत या अधिक है तो प्रत्येक निकाय में पिछड़े वर्ग (ए) से संबंधित कम से कम एक पार्षद होगा।

पदों की संख्या का 8% पिछड़े वर्ग ब्लॉक-ए के लिए होगा आरक्षित

नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में महापौरों, अध्यक्षों के पदों की संख्या का आठ प्रतिशत नागरिकों के पिछड़े वर्ग ब्लॉक-ए के लिए आरक्षित होगा। दशमलव मान 0.5 या अधिक होने की स्थिति में इसे अगले उच्च पूर्णांक तक पूर्णांक बनाया जाएगा। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशानुसार आरक्षण किसी भी नगर निकायों में अनुसूचित जाति और बीसी (ए) के पक्ष में आरक्षित कुल सीटों के कुल 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

50% से सीटें अधिक होने पर ये नियम होगा लागू

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पिछड़े वर्ग (ए) के लिए इस प्रकार आरक्षित सीटों की संख्या को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या के साथ जोड़ने पर यदि उनकी कुल संख्या नगर निकायों की कुल सीटों के 50 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो पिछड़े वर्ग (ए) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को वहीं तक रखा जाएगा, जिससे कि अनुसूचित जाति और बीसी (ए) का आरक्षण नगर पालिका, नगर परिषद व नगर निगम के सदस्य की कुल सीटों के 50 प्रतिशत से अधिक न हो।

ऐसे तय होगी आरक्षण व्यवस्था

रिपोर्ट में आरक्षण को उदाहरण देकर कहा गया है कि शहरी स्थानीय क्षेत्र में, “ए” नागरिकों के ब्लॉक ए के पिछड़े वर्ग की आबादी उस शहरी स्थानीय क्षेत्र की कुल आबादी का 25 प्रतिशत है, तो 12.5 प्रतिशत सीटें पिछड़े वर्ग के ब्लॉक-ए नागरिकों के लिए आरक्षित होंगी। जहां किसी दिए गए शहरी स्थानीय क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी 50 प्रतिशत या उससे अधिक है, वहां के नागरिकों के पिछड़े वर्ग ब्लॉक-ए को उनकी आबादी के प्रतिशत के बावजूद कोई आरक्षण नहीं मिलेगा।

ऐसी परिस्थितियों होंगी 4 सीटें आरक्षित

जहां अनुसूचित जाति की जनसंख्या शहरी स्थानीय निकाय की जनसंख्या का 40 प्रतिशत है तथा शहरी स्थानीय क्षेत्र में 10 सीटें हैं तो अनुसूचित जाति के लिए 4 सीटें आरक्षित होंगी, शेष एक सीट पिछड़ा वर्ग ब्लॉक के लिए उपलब्ध होगी। पिछड़ा वर्ग ब्लॉक-ए के नागरिकों को नगर पालिका में एक सीट मिलेगी, भले ही उनके लिए उपलब्ध आरक्षण के प्रतिशत के अनुसार कोई सीट उपलब्ध न हो, बशर्ते कि संबंधित शहरी स्थानीय क्षेत्र में उनकी आबादी 2 प्रतिशत से कम न हो।