सभी बच्चे अपनी माँ का सम्मान करें, क्योंकि माँ में ही बसता है बच्चे का संसार : देवी रानी सोलंकी

कहा :- माँ के स्नेह का कर्ज पूरा जीवन नहीं उतार सकते, इसलिए सदैव करे माँ का आदर

भूप एक्स्प्रेस।

पानीपत, 13 मई। मदर्स डे अर्थात़ के माँ के लिए समर्पित दिन, एक ऐसा दिन है, जिस दिन बच्चे अपनी मां के सम्मान के लिए उन्हें स्पेशल फील कराते हैं, उन्हें एहसास कराते हैं कि वह उनकी माँ है और वें उसके बच्चे हैं। ये बात सच्च है कि मां का ऋण जीवन में कोई कभी नहीं उतार सकता, क्योंकि मां तो शब्द ही ऐसा है जिसमें बच्चे का पूरा संसार बसता है।

उक्त बातें शनिवार को द्रोणाचार्य विद्या मन्दिर पानीपत की कार्यकारी मुख्यध्यापिका देवी रानी सोलंकी ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मां और बच्चों  के स्नेह का ये दिन पूरे विश्व में मई महिने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। मदर्स डे की शुरुआत के बारे जानकारी देते हुए देवी रानी सोलंकी ने बच्चों ने बताया कि ‘मदर्स डे’ की शुरूआत करने का श्रेय अमेरिका की ऐना. एम. जारविस को जाता है। बताया जाता है कि ऐना की मां अन्ना एक स्कूल में अध्यापिका थी। एक दिन स्कूल में बच्चों को पढ़ाते समय उन्होंने बताया कि एक दिन ऐसा जरूर आएगा, जब माँ के लिए ‘एक दिन समर्पित किया जाएगा’। जब ऐना की मां निधन हुआ तो ऐना और उसके दोस्तों को ऐना की माँ अन्ना की वो बात बहुत याद आने लगी जिसमें उन्होंने कहा था कि एक माँ के समर्पित का दिन जरूर आएगा। बस इसी बात को लेकर ऐना ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक अभियान शुरु कर दिया, जिसमें मदर्स डे के दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित हो। सोलंकी ने कहा कि ऐना इसलिए ऐसा करना चाहती थी ताकि बच्चे अपनी माँ का सम्मान जब तक करते रहे, तब तक उनकी मां जिंदा हैं, तब तक उनका सम्मान करें, उन्हें कभी भी यह एहसास ना हो कि वें उसे अनदेखा कर रहे हैं, सदैव उनके योगदान की सराहना करें। ऐना द्वारा चलाए गए अभियान का परिणाम ये हुआ कि सबसे पहला मदर्स-डे 8 मई 1914 को अमेरिका में मनाया गया और तब से आज तक मई महिने के दूसरे रविवार को लगभग पूरे विश्व में मदर्स डे के रुप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि हालांकि कुछ देश ऐसे भी हैं जहाँ मदर्स डे मार्च के महीने भी मनाया जाता है।

दवी रानी सोलंकी ने कहा कि वह मानती है कि आधुनिक युग में भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग हर रोज अपनी मां के लिए कई बार वक्त नहीं निकाल पाते और ना ही उनसे मिल पाते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वें अपनी माँ को भूल जाएं। बच्चों कभी भी अपनी माँ को मत भूलना क्योंकि माँ ही तो है जो जिसने हमें हंसना, चलना, खेलना, खाना-पीना और जीना सिखाया है। आज जो भी हम है वों सब माँ के उस स्नेह के कारण है जिसका कर्ज हम पूरा जीवन नहीं उतार सकते। इसलिए कभी भी माँ का निरादर मत करना, माँ के दिल को मत दुखाना, उसे हमेशा अपनेपन का ऐहसास होना चाहिए। इसलिए कभी भी माँ का सम्मान करना मत भूलना और यह मई महिने का दूसरा दिन भी इसलिए मदर्स डे के नाम से मनाया जाता है ताकि कम से कम एक दिन तो हम अपनी माँ को सम्मान दे सकें। उन्होंने बच्चों से कहा वें बड़े होकर कभी अपनी माँ के स्नेह को ना भूले और सदैव अपनी माँ का आदर करें, उनका सम्मान करें, उनके दिल को कभी ठेस ना पँहुचाएं। उन्होंने कहा कि इस दिन सभी बच्चे अपनी मां को स्पेशल फील कराने के लिए अलग-अलग गिफ्ट देते है और फूल और अन्य सामान मां को देकर उन्हें स्पेशल फील कराते हैं।

इससे पूर्व नन्हें मुन्ने बच्चों ने मदर्स डे से सुसज्जीत तरह-तरह के चित्र बनाकर, उन्हें रंगों से सजाकर अपनी कक्षा अध्यापिकाओं को दिखाते हुए अपनी माँ के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाया। जो वास्तव में बहुत ही सराहनीय एवं सुन्दर थे।

इस दौरान बच्चों ने सोलंकी की बातों का ध्यान से सुना और सभी बच्चों ने एक आवाज में वचन दिया कि जीवन में कभी अपनी माँ का निरादर नहीं करेंगेा, हमेशा उनका सम्मान करेंगे, उन्हें हमेशा खुश रखेंगे। इस दौरान रोहित सोलंकी, करिश्मा, रेणू, गीता आदि ने बच्चों का अच्छा मार्गदशन किया।