लॉकडाउन के दौरान गलत तरीके से बैठकर काम करने से बढ़ रहे है, जोड़ों के दर्द के मामले

भूप एक्सप्रेस।
गाजियाबाद। सेंटर फॉर नी एंड हिप केयर गाजियाबाद से डॉ. अखिलेश यादव का मानना है कि इन दिनों जोड़ों के दर्द के बढ़ते मामले कोई नई और असाधारण बात नहीं है, लेकिन कोरोना काल में युवा और अधेड़ उम्र के लोगों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ी है। कोविड के कारण लोगों का संपूर्ण स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है क्योंकि इस संक्रमण से प्रभावित व्यक्ति होम क्वारंटीन या अस्पताल में भर्ती होने के कारण लंबे समय तक निष्क्रिय हो जाता है। इसके अलावा वायरस के दुष्प्रभावों के कारण भी मांसपेशियों और जोड़ों में कमजोरी के मामले बढ़े हैं।
कोविड की परेशानियों के साथ पारिवारिक पृष्ठभूमि, उम्र संबंधी परेशानियां, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, रूमेटोइड अर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस तथा सूजन संबंधी बीमारियों जैसे संक्रमण समेत कई कारण भी जोड़ों के दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। विटामिन डी3 और बी12 समेत अन्य पोषक तत्वों की कमी के कारण जोड़ों को मजबूती देने वाली हड्डियों और कार्टिलेज पर बुरा असर पड़ता है।
पहले से किसी तरह की समस्या से ग्रस्त व्यक्तियों में भी कोविड के बाद के दौर में जोड़ों का दर्द, सूजन, मांसपेशियों और जोड़ों में अकड़न, चलने-फिरने में दिक्कत आदि की आशंका रहती है। इस समस्या की गंभीरता जहां आंशिक से लेकर मामूली तक होती है, वहीं बहुत से मरीज लॉकडाउन के दौरान इस तरह की गंभीर और बार-बार आने वाली समस्या की शिकायत लेकर आए हैं।
प्रोफेशनल्स के बीच जोड़ों के दर्द के मामलों का एक बड़ा कारण घर से काम करना भी बन रहा है। वैसे तो ज्यादातर कामकाजी प्रोफेशनल्स हमेशा घर से काम करने का ख्वाब देखते हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान काम करते वक्त गलत तरीके से बैठकर काम करने, आरामदेह स्थिति में काम करने के कारण लंबे समय तक जोड़ों संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।
जंक और फ्रोजन फूड पर बढ़ती निर्भरता अर्थराइटिस और जोड़ों के असह्य होते दर्द के मामले बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। हाई-फैट जंक फूड में मौजूद बैक्टीरिया शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे हमारे शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली (इम्युन सिस्टम) घुटने जैसे जोंड़ों की कार्टिलेज और कोशिकाओं पर ही हमला करने लगती है, जिससे काफी नुकसान होता है और खासकर संवेदनशील अंगों पर ज्यादा असर पड़ता है।
इस समस्या के साथ मोटापा, व्यायाम का अभाव, बोन डेंसिटी, पेशे से जुड़ी इंजुरी, कामकाज का खराब माहौल जैसे ठीक होने वाले और ठीक नहीं होने वाले कई रिस्क फैक्टर्स जुड़े हुए हैं। दर्द के कारण शारीरिक क्षमता कम होने लगती है और इससे जीवन की गुणवत्ता कमजोर हो जाती है तथा दूसरी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
हालांकि नियमित व्यायाम करने बैठने या झुकने आदि जैसे प्रक्रियाओं में सुरक्षित मानकों को अपनाने जैसे सक्रिय लाइफस्टाइल बनाए रखने से बहुत सारी समस्याओं से बचा जा सकता है।
कई वर्षों से सक्रिय लाइफस्टाइल अपनाने वाले जो लोग कोविड महामारी के दौरान निष्क्रिय हो गए हैं, उनके संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। बैठने-सोने की खराब मुद्रा या आराम करने के लिए लेट जाने और शरीर को बहुत कम सक्रिय रखने के कारण शरीर अकड़ जैसा जाता है। इस अकड़न और इससे जुड़ी समस्याओं से बचने तथा लंबे समय तक पूरी तरह से स्वस्थ जोड़ बनाए रखने के लिए खुद को सक्रिय रखना ही सबसे अच्छा उपाय है। हल्का-फुल्का व्यायाम भी दर्द से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकता है।