सवाल कोई भी हो जवाब आप हो, चलते रहना , बढते रहना : आनंदश्र

 

भूप एक्सप्रेस।

मुंबई। समय की अपनी गति है, इंसान की अपनी गति है। पूरा ब्रह्माण्ड में हर चीज अपनी अपनी गति से चल रही है। हर घटना स्वयंचालित स्वयं घटित हो रही है। जिंदगी भले ही जैसी भी है, लेकिन यह संदेश देती है- कुछ भी हो, आगे बढते रहो। थमना मौत और चलना जिंदगी है।

जानो क्या पकड़ना है और क्या छोड़ना है

आध्यात्मिक व्याख्याता एवं माइन्डसेट गुरुु डॉ दिनेश गुप्ता(आनंदश्री) ने कहा कि हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि क्या रोके और क्या छोड़े। अपने स्वप्नों और लक्ष्यों को प्राप्त करने का भी प्रयास करना हो, किसी आदत को छोड़ना हो, अवसाद व व्याकुलता से पार पाना हो, हममें से किसी के लिए एसा करना चुनौतीपूर्ण होता है। हमारे अंदर के कुछ भय, हमारी सीमाएं, कड़वे अनुभव समय-समय पर बाहर आ जाते हैं। यह अच्छी बात भी है, इससे हमें उनसे निकलने में सहायता मिलती है। हम अपने भीतर के सच को देख पाते हैं। अपनी सहज आत्मिक ऊर्जा के प्रवाह का आनंद ले पाते हैं। हम क्या बन सकते हैं, हमारे पास क्या हैं? हमारे अनुभव कैसे हैं? हम क्या कर रहे हैं? और हम क्या करते हैं? आदि अपने बारे में सही ढंग से समझने के लिए हमें आरामदायक क्षेत्र अर्थात् सुरक्षित घेरे को छोड़ना पड़ता है। अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर ही आपका विकास संभव है।

अधिकतर लोग अपने घेरे से बाहर नहीं निकलना चाहते। यह सरल भी होता है, क्योंकि हम प्रत्येक वस्तु से परिचित होते हैं। पर क्या ऐसा सच में होता है? क्या हम भायभीत होते हैं कि दूसरे क्या कहेंगे? हां, हमें असफल होने का भय भयभीत करता है। हमारी ज़िंदगी रोज हमसे सवाल पूछती है। रोज नया सवाल। हो सकता है कि जिंदगी सवालों से भरी पड़ी है। याद रखिये सवाल कोई भी हो, जवाब आपके पास है। और वह जवाब सिर्फ आप हो।