हरियाणा सरकार की 28 अगस्त 2018 की क्रिमीलेयर सम्बन्धी नोटिफिकेशन सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

 

भूप एक्सप्रेस।

चंडीगढ़ (अजयकुमार)। आज 24 अगस्त 2021 के दिन पिछड़ा वर्ग के लिए खुशी का दिन है। हरियाणा सरकार ने क्रिमीलेयर में दो स्लैब बना दिये थे, 0 से 3 लाख एवम 3 से 6 लख सालाना इनकम के। जिससे जमीनी स्तर पर पिछडो को आरक्षण का लाभ मिलने से वंचित हो गए थे।
इसी संधर्ब में पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा के हरियाणा में गठन की जरूरत पड़ी और इसके संरक्षक श्री शांता कुमार आर्य जी के नेतृत्व में हरियाणा के हर जिले में मीटिंगों का दौर शुरू हुआ। सभा के अध्यक्ष प्रोफेसर लिम्बा जी, श्री इंदर जी जजनवाला, एवम कार्यकर्ता के रूप में डॉ अजय प्रजापतिः चण्डीगढ़, rti एक्टिविस्ट धर्मबीर बैनीवाल जी, मनोज विश्वकर्मा जी, पूर्व सरपंच मुगलपुरा सत्यवान जी, मास्टर जय भगवान जी हिसार, श्री रजिंदर जखड़ जी, एडवोकेट धीमान, जांगड़ा सभा, सैन सभा, एवम सभी जुझारू साथीगण एवम सभा के माननीय अध्य्क्ष ने इस क्रिमीलेयर को निरस्त करने में अहम भूमिका निभाई।
क्योंकि इस नोटिफिकेशन के कारण हरियाणा में पिछडो के बच्चो के दाखिले में MBBS कोर्सेज में बहुत अड़चन आयी थी और कुल 25 विद्यार्थियों के एडमिशन कैंसिल हो गए थे और उनके भिवष्य पर इस नोटिफिकेशन ने तलवार लटका दी थी।
इस संधर्ब में हरियाणा के हिसार क्षेत्र से पहली मीटिंग पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा के बन्नेर तले माननीय शांता कुमार आर्य जी की अध्यक्षता में रखी गयी और फिर जींद कुरुक्षेत्र, रोहतक, भिवानी, रेवाड़ी, महेन्दरगढ़ आदि जिलों में मीटिंगों का दौर शुरू हुआ और समाज का पैसा एकत्रित कर केस को हाई कोर्ट एवम सुप्रीम कोर्ट में रखा गया।

मौजूदा सरकार से भी मीटिंग करके इस नोटिफिकेशन को निरस्त करने एवम पिछडो के वुरुद्ध होने की बात कही। परन्तु हाल ही के मुख्यमंत्री हरियाणा ने इसको नकार दिया और तर्क दिया के पिछडो में जो गरीब है उसको पहले आरक्षण का लाभ मिले इसलिए इसकी जरूरत पड़ी और लागू किया। परन्तु ये तर्क सुप्रीम कोर्ट में नही चला और आज फैंसला हमारे हक में आया है।

इस नोटिफिकेशन के लिए जींद उपचुनाव से पहले भी पिछड़ा वर्ग ने अपनी बात रखी थी परन्तु आश्वाशन ही मिला और इस संधर्ब में कोई कार्यवाही नही हुई। इसके उपरांत 8 % आरक्षण पंचायती चुनावो में अतिपिछड़ों को देने सम्बन्धी सरकार ने ऐलान किया और हिसार में धन्यवाद रैली रखी गयी।
उस समय भी मुख्यमंत्री द्वरा यही तर्क दिया गया के 0 से 3 लाख वाला गरीब या 3 से 6 लाख वाला। अस वक़्त ट्राईसिटी चण्डीगढ़ के सयोंजक डॉ अजय प्रजापतिः द्वारा तीन पेज का पत्र माननीय मुख्यमंत्री जी को लिखा गया और उनसे इस तर्क पर स्पस्टीकरण भी मंगा गया। के एक तरफ ews कैटगरी में 8 लाख वाला गरीब और पिछडो में 3 लाख वाला गरीब ऐसा क्यों? देश एक तो कानून दो क्यों? क्या 3 लाख आमदनी वाला अपने बच्चो को MBBS, NEET, इंजीनियरिंग, आदि महंगे कुर्सिस की तैयारी करवा पा रहा है?
साथ ही जब ओबीसी आरक्षण लागू हुआ तो इंदिरा साहनी बेंच की जुद्ग्मेंट में साफ कहा गया था के आर्थिक आधार पर पिछडो का वर्गीकरण नही किया जा सकता। आज सुप्रीम कोर्ट की इस फैंसले ने सरकार की नोटिफिकेशन को निरस्त कर दिया है और पिछड़ा वर्ग को इस दुविधा से निकला है।