बापौली के गावों में बरसात ने खोली विकास कार्यो की पोल,घरो में घूसा बरसात का पानी

भूप एक्सप्रेस।
बापौली/पानीपत, 11 सितंबर (अलीमेहर) : झमाझम बारिस होनें से जहां एक और लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दुसरी और कुछ किसानों के चेहरे खिले तो कुछ किसानों के चेहरे मुरझाएं हुए दिखाई दिए, अधिकांश गांवो मे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था ना होने से बारिस ने निकासी की व्यवस्था की पोल भी खोल दी। गांवों में बरसात का पानी जमा होने के कारण गलियों ने जहां तालाब  का रूप धारण कर लिया है और कीचड़ भी लबालब भर गया है जिससें लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है शनिवार सुबह हुई तेज बारिस से लोगों को राहत मिली है, फसलों मे हरियाली लहराने से किसानों के चेहरे भी मुस्कुरातें दिखाई दिए। लेकिन सब्जीं उगाने वाले किसानों के चेहरों पर हल्की सी मायूसी नजर आई। परन्तु खण्ड के अधिंकाश गांवों मे पानी की निकासी की व्यवस्था व विकास कार्यो के बड़े – बड़े दावे करने वाली पंचायतों व प्रशासन की पोल मात्र कुछ समय हुई बरसात से गलियों मे भारी मात्रा मे पानी जमा होने से गलियां तालाब की तरह नजर आने से खुल गई। कीचड़ भी लबालब होने के कारण लोगो को घरों से निकलना मुश्किल हो जाने से काम काज मे कठिनाई का सामना करना पड़ा है, आस-पास के ग्रामीणों धर्मबीर, प्रमोद, विकास, मेनपाल, रमेश, विजय, पंकज, प्रमोद, गौरव, अमित  आदि का कहना है कि पिछलें कई माह से उनके गांवो मे निकासी की व्यवस्था ठप्प पड़ी है। लेकिन ग्राम पंचायत व प्रशासन की झूठी वाह-वाही लूटने के लिए विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है। परन्तु अब मात्र कुछ ही बारिस होने के कारण गलियों व नालियों में बारिस का गंदा पानी जमा हो गया है,जिससें गली मे कीचड़ भी लबालब भर गया है। जिससें पंचायतों के विकास कार्यो के साथ-साथ सरकार द्वारा कराएं जा रहे विकास कार्यो की पोल भी इन्द्र देव ने खोल दी है।

खण्ड के अधिकांश गांवो मे पानी की निकासी व्यवस्था अच्छी ना होने के कारण हल्की सी बारिस भी हो जाने के कारण गांव की गलियों मे नालियों का गंदा व बारिस का पानी जमा हो जाता है,लेकिन पानी निकासी की व्यवस्था उचित ना होने से गलियां तालाब का रूप धारण कर रही है,लेकिन किसी का इस और कोई ध्यान नही है जिस कारण गली में लबालब कीचड़ जमा होने से ग्रामीणों को पानी के अंदर से ही गुजरना पड़ रहा है जिससे ग्रामीणों के पैर भी खराब होने लगे है।

कुछ ग्रामीणों को कहना है कि सफाई कर्मचारी गांव मे पार्टी बाजी करते है और जहां पहले सरपंच कहते थे वहीं सफाई करते थें और अन्य दुसरे मोहल्लो में सफाई नही करते थें जिसकारण गांवो मे पानी की निकासी के लिए बनाए गए नाले कीचड़ से लबालब भरने के कारण पानी निकासी व्यवस्था ठप्प पडी रहती थी। वहीं अब सरपंचों से चार्ज प्रशासन के पास जाने के बाद तो सफाई कर्मचारीयों ने काम करना ही बंद कर दिया है और ग्रामीणों के कहने के बावजूद भी मात्र औपचारिकता पूरी करते है। जिसकारण पानी गलियों मे जमा होने लगा है,इसके बारे मे अगर वो सफाई कर्मचारीयों को सफाई करने के बारे मे कहते है तो एक ही जवाब मिलता है कि वो उनके  नौकर नही है जहां उनका मन करेगा सफाई करेगें अगर नही करेगा तो नही करेगें अगर ज्यादा परेशानी हो तो अपने आप सफाई कर लो।