शांति की शुरुआत मन से होती है : आनंदश्री

21 सितंबर " विश्व शान्ति दिवस विशेष "

भूपेक्सप्रेस।
मुंबई। महामारी ने जीवन के तरीके को बदला। हिंसा के बगैर ही अशांति फैलाने में कोई कसर नही छोड़ी।

इस वर्ष का थीम

विश्व शांति दिवस हर साल 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित दिन है।
हर वर्ष एक थीम के साथ विश्व शांति दिवस मनाया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के लिए 2021 की थीम “एक समान और टिकाऊ दुनिया के लिए बेहतर तरीके से पुनर्प्राप्त करना” है।
सभी को समान तरीके से मदद मिले। इस लिए इस बार समान और टिकाऊ समाज के लिए बेहतर रिकवरी स्थापित करना है। आज समान रूप से और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की जरूरत है जो सभी के लिए समान रोजगार उपलब्ध कराए।

क्या पैसे से शान्ति आएगी ?
शांति अगर किसी वस्तु या पैसे पर टिकी है तो वह अस्थायी है। वस्तु जाते ही लोग अशांत हो जाएंगे।

शांति इंडिपेंडेंस और ऑटोनॉमस है

यह किसी पर टिकी नही होती। शांति का मतलब सिर्फ अहिंसा ही नही बल्कि हर परिस्थिति में स्वयं को एक जैसा रखना। बारिश, तूफान, धूप , छांव, दिन, रात, पहाड़, खाई और राग द्वेष में शांत रहना।

कोई भी शांति को प्राप्त कर सकता है

आप जो भी कार्य कर रहे हो, जो भी उम्र हो आप शांत रहना सीख सकते है। बचपन मे ही खेल खेल में सूर्य को खा जाने वाले भगवान हनुमान को भी आप ध्यान करते हुए देखेंगे। शांति में देखोगे।

शांति की अनोखी कहानी
एक राजा ने अपने राज्य में एलान कराया कि ” शांति ” विषय पर अनोका चित्र बनाने की प्रतियोगिता रखी। राज्य के तमाम चित्रकारों ने शांति पर एक से एक चित्र बनाये। राजा ताज्जुब में था किसी चुने । किसी ने शांति निसर्ग का चित्र बनाया, किसी ने शांत तालाब, जंगल तो किसी ने नीले शांत आसमान को बनाया।
लेकिन राजा ने एक तस्वीर को चुना जिसमे एक काली तूफान की रात थी, बिजली कड़क रही थी, लहरें उफान पर थी। दरबारी इस चित्र को देख कर आश्चर्य थे कि राजा ने इस अशांति भरे तस्वीर को क्यो चुना।
राजा ने कहा ” भले हो इस तस्वीर में सब कुछ तहस नहर अशांति जैसा है लेकिन एक बात जब मैंने देखी की इसमें एक पेड़ है। उस पेड़ पर एक पंक्षी अपने बच्चो के साथ आरामदायक गहन शांति से बैठा है। उसे विश्वास है अपने ईश्वर पर। इस अशांति में वह शांत है। ”

ध्यान और शांति
ध्यान से शांति संभव है। अभ्यास, अभ्यास और अभ्यास से। शांति एक समझ है। अपने आप को और इस दुनिया को साक्षी भाव से देखने का नाम है। शांति अपने अनुभव में रहने का नाम है।