भूप एक्सप्रेस। पानीपत, 03 जून, 2024 (मामन छाछिया) हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम आने में अब चंद घंटे ही शेष नहीं बचे है और इस चुनाव के प्रणाम भले ही जो भी रहे हैं, लेकिन इस चुनाव में सबसे बड़ी बात ये भी देखने को मिली कि पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ढ़ेरों प्रतिकूल हालातो के बीच प्रदेश कांग्रेस को चुपके-चुपके दलित वोट बैंक के तौर पर संजीवनी देने का काम कर गई। दलित समाज को कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है। किंतु लंबे अरसे से ये वोट बैंक कांग्रेस के हाथों से खिसक गया था और इसी के परिणाम स्वरूप कांग्रेस को ना केवल हरियाणा में सत्ता से दूर रहना पड़ रहा हैं बल्कि लोस चुनावों में भी इसका नुक्शान झेलना पड़ रहा था।   मगर इस लोस इस चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के सरेआम विरोध ने जहां बीजेपी की नाक में दम करने का काम किया, वहीं संविधान संरक्षण के मुद्दे को लेकर भयभीत नजर आ रहे दलित समाज ने भी कुमारी सैलजा का खुला भरोसा मिलने से बीजेपी से आंख फेरने का काम किया। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि प्रदेश में दलित वोट बैंक की हैसियत बेहद मजबूत है और इसे हर किसी राजनीतिक दल के लिए उनकी अपनी नींव से लेकर सत्ता की सीढ़ी तक के तौर पर स्वीकार किया जाता है। फिलहाल प्रदेश में सैलजा के अलावा किसी भी दल के पास सैलजा जैसा कद्दावर नेता नहीं हैं, जो ना सिर्फ दलितों के भविष्य का भरोसा बन सके बल्कि उनका नाम दमदार की बजाए सीएम शीप के सर्वमान्य हकदार चेहरों में गिना जा सके। ऐसी स्थिति में लाजमी है कि कुमारी सैलजा को पार्टी को और मजबूत करने के साथ-साथ अपने दलित समाज के हक और अधिकारों के प्रति भी और ज्यादा सजग और सतर्क रह करके काम करने की जरूरत थी। ये बात और है कि चुनाव के दौरान कांग्रेस में ऐसे नेताओं की भी कोई कमी नहीं रही, जिन्होंने सरकार विरोधी लहर को पिता-पुत्र की ताकत का रूप देने की कोशिश ना की हो। कई उम्मीदवार भी उन्हीं नेताओं के सुर में सुर मिलाते नजर आए। उधर पूरे चुनाव और उसके बाद के घटनाक्रम से प्रतीत होता है कि खुद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी एक दरबारी और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान एक परिवार विशेष के हनुमान की अपनी भूमिका से बाहर नहीं निकल पाए, बावजूद इसके कुमारी सैलजा ने अपना धर्म निभाया और अपने सभी साथियों और समर्थको को सिर्फ और सिर्फ पार्टी के लिए निष्ठा व समर्पित भाव से काम करने की हिदायत दी। ऊपर से कुमारी सैलजा ने अपने दलित समाज को किसी भी किंतु परंतु में ना फंसते हुए साफ-साफ शब्दों में संदेश दिया कि संविधान ही हमारे सम्मान और उत्थान का आधार हैं, जिसे बचाने के लिए कांग्रेस को हर सूरत में सत्ता में लाना होगा। कुमारी सैलजा का यही संदेश अब प्रदेश में कांग्रेस की डूबती नैया को पार करने वाला सिद्ध होता प्रतीत हो रहा है। क्योंकि प्रदेश का दलित समाज कुमारी सैलजा के साथ आज लामबंद खड़ा है और वह किसी भी कीमत पर अपनी नेता कुमारी सैलजा को कमजोर नहीं करना चाहता। कुमारी सैलजा की यही सकारात्मक सोच एसआरके अच्छा को भी नया हौसला और हिम्मत देती दिखाई पड़ रही है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि अगर प्रदेश में लोकसभा चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो उसमें कुमारी सैलजा का एक विशेष योगदान होगा, जो आगे चलकर विस चुनाव में निश्चित तौर पर पार्टी को सत्ता की दहलीज तक पहुंचने का काम करेगा। वही सैलजा की इस दमदार भूमिका को पार्टी के प्रतिद्वंदी नेताओं के अलावा विरोधी दल भी अभी से भविष्य के भय के तराजू में तोलने लगे हैं।